थोड़ा सा इधर भी...
- होड़ शालीनता की करो, फिजूलखर्ची की मत करो।
- अपने लाभ के लिए औरों का नुकसान मत करो।
- संकट में साथ देने वाला ही सच्चा मित्र है, बाजार में नमस्कार करने वाला नहीं।
- अहसान मानो पर अहसान मत करो।
- किसी को धोखा मत दो पर धोखेबाज से सावधान रहो।
- आज का काम कल पर मत छोड़ो।
- विनम्रता अच्छी है और अभिमान बुरा है।
- सेवा का धर्म सर्वोपरि है।
- जाति कर्म से बनती है, जन्म से नहीं।
- मानव-धर्म एक है, परंतु जाति धर्म पृथक-पृथक होता है।
- पाप वही है जिसको करने से निंदा होती हो।
- पुण्य वही है जिसको करने से प्रशंसा होती है।
- धर्म संकीर्णता से नहीं बढ़ेगा और पाप पश्चाताप से नहीं बढ़ेगा।
- कीमत हिम्मत की है, कायरता की नहीं।
- आशा ही लक्ष्य की पूर्ति कर सकती है, निराशा नहीं।
- मानव धर्म समझने वाला गृहस्थी संन्यासी से कम नहीं है।
- गृहस्थ संन्यास से भी श्रेष्ठ है।
- जन्म भोग-भोगने के लिए ही होता है।
- मनुष्य के लिए स्वर्ग और नरक दोनों खुले हैं, जहां जाना चाहे, कर्म करके जा सकता है।
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