Monday, October 20, 2008

क्रांति में ही शांति है

मन को शांत रखना, पाप से हटाना और धर्म में सक्रिय होना एक अलौकिक क्रांति है।
एक शाश्वत्‌ क्रांति है.
देह में बैठे पंछी ने पंख फैला दिए हैं, प्राणों का पंछी उड़ान भरने की तैयारी में है. जल्द ही उड़ान भर लेगा और हम हाथ मलते रह जाएँगे. प्राण पखेरू उड़ें उससे पहले चरित्र ऊँचा उठा लें हर दिन प्रार्थना करें,मनन करें, धार्मिक होने के लिए अंतिम दिन की प्रतीक्षा न करें.आज के दिन को हम प्रार्थना भक्ति,
भजन, स्वतन और आध्यात्मिक गीतावली से शुरू करें,ताकि इन्हें गुनगुनाते हुए हम व्यर्थ के विकल्पों से बचें रहें.

No comments: